kahii par zulm ke sholay kahii par khud-parasti hai | कहीं पर ज़ुल्म के शो'ले कहीं पर ख़ुद-परस्ती है

  - Ali Khan Jauhar
कहींपरज़ुल्मकेशो'लेकहींपरख़ुद-परस्तीहै
चमनकीआबरूख़तरेमेंहैयेबातसच्चीहै
वोघोलाज़हरनफ़रतकासियासतनेफ़ज़ाओंमें
गुलोंकीआँखसेशबनमलहूबनकरटपकतीहै
बग़ावतपरअगरहमलोगउतरआएतोक्याहोगा
अभीतोहमनेरस्सीसब्रकीयेथामरक्खीहै
वहाँइंसाफ़कीउम्मीदलेकरजारहेहोतुम
जहाँक़ानूननेआँखोंसेपट्टीबाँधरक्खीहै
तड़पताहूँबिछड़करआपसेकुछइसतरह'जौहर'
बिनापानीकेजैसेरेतपेमछलीतड़पतीहै
  - Ali Khan Jauhar
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