teri zulfon ke pech-o-kham ki qasam | तेरी ज़ुल्फ़ों के पेच-ओ-ख़म की क़सम

  - Ali Fraz Rezvi
तेरीज़ुल्फ़ोंकेपेच-ओ-ख़मकीक़सम
चैनसेहैंतेरेसितमकीक़सम
जिसनेदेखींसोदिलगँवाबैठा
तेरीआँखेंवोजाम-ए-जमकीक़सम
हमतोदेखाकिएथेहसरतसे
सुर्ख़ी-ए-लबकोचश्म-ए-नमकीक़सम
लड़खड़ानाहैउनकीफ़ितरतमें
कौनखाएतेरेक़दमकीक़सम
जानेकबपीथीपरनशागया
मेरेसाक़ीतेरेकरमकीक़सम
बुतगएबुत-कदाहैवीराना
दिलहैबाक़ीअभीहरमकीक़सम
होमुबारकतुम्हेंयेबज़्म-ए-तुराब
हमभीख़ुशहैंजहान-ए-ग़मकीक़सम
  - Ali Fraz Rezvi
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