zabaan chup hai magar zehan ro raha hai lahu | ज़बान चुप है मगर ज़ेहन रो रहा है लहू

  - Ali Akbar Abbas
ज़बानचुपहैमगरज़ेहनरोरहाहैलहू
किजीते-जागतेलोगोंकासोरहाहैलहू
तमामउम्रमिलाज़हरइसतसलसुलसे
किअपने-आपमेंतिरयाकहोरहाहैलहू
रगोंमेंउतरीहैजोशयवोना-मुवाफ़िक़है
किसारेजिस्ममेंकाँटेसेबोरहाहैलहू
बसएकदाएरेमेंरक़्सकररहेहैंहवासे
ख़यालहैकिबगूलाबिलोरहाहैलहू
हरएकलहज़ाउतरतीकसाफ़तेंमुझमें
औरएकगर्दिश-ए-पैहममेंधोरहाहैलहू
कोईकुमकतोमिलेअबमुदाफ़अतकेलिए
वगर्नारंगकीताक़तभीखोरहाहैलहू
  - Ali Akbar Abbas
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