saara din be-kaar baithe shaam ko ghar aa ga.e | सारा दिन बे-कार बैठे शाम को घर आ गए

  - Ali Akbar Abbas
सारादिनबे-कारबैठेशामकोघरगए
ख़्वाबमेंचलनेलगेदीवारसेटकरागए
मैंभरीसड़कोंपेभीबे-चापचलनेलगगया
घरमेंसोएलोगमेरेज़ेहनपरयूँँछागए
मेराबेटामेरेदुश्मनकीहीतस्वीरेंबनाए
मेरेअब्बाउसकीकापीदेखकरघबरागए
जबभीसूरजडूबतेदेखामैंख़ुशहोनेलगा
परकईमनहूसचमगादड़मुझेलर्ज़ागए
आसमाँकीसम्तदेखाबादलोंकेवास्ते
देखतेहीदेखतेचीलोंकेदिलमंडलागए
  - Ali Akbar Abbas
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