ab jaam nigaahon ke nasha kyun nahin dete | अब जाम निगाहों के नशा क्यूँँ नहीं देते

  - Aleem Usmani
अबजामनिगाहोंकेनशाक्यूँँनहींदेते
अबबोलमोहब्बतकेमज़ाक्यूँँनहींदेते
तुमखोलकेज़ुल्फ़ोंकोउड़ाक्यूँँनहींदेते
तुमशानघटाओंकीघटाक्यूँँनहींदेते
इकघूँटकीउम्मीदसमुंदरसेनहींजब
फिरआगसमुंदरमेंलगाक्यूँँनहींदेते
हैमुंतज़िर-ए-हश्रबहुतदेरसेदुनिया
घुंघरूतिरेपैरोंकेसदाक्यूँँनहींदेते
येधूपरहेगीतोयेरुस्वाईकरेगी
सूरजकोगुनहगारबुझाक्यूँँनहींदेते
तुमदूसरेलोगोंपेरक्खाकरोइल्ज़ाम
हरबातमेंतुममेरीख़ताक्यूँँनहींदेते
क़ातिलकाहैक्यानामयेसबपूछरहेहैं
क्याहमभीहैंहमनामबताक्यूँँनहींदेते
तुमकोमिरेअंदाज़-ए-वफ़ासेहैशिकायत
तुममुझकोवफ़ाकरकेदिखाक्यूँँनहींदेते
जोलोग'अलीम'अपनीजगहमीरबनेहैं
अशआ'रकोवोतर्ज़-ए-अदाक्यूँँनहींदेते
  - Aleem Usmani
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