baada-khaane ki rivaayat ko nibh | बादा-ख़ाने की रिवायत को निभाना चाहिए

  - Aleem Usmani
बादा-ख़ानेकीरिवायतकोनिभानाचाहिए
जामअगरख़ालीभीहोगर्दिशमेंआनाचाहिए
आजआनाहैउन्हेंलेकिनआनाचाहिए
वा'दा-ए-फ़र्दाउसूलनभूलजानाचाहिए
तर्ककरनाचाहिएहरगिज़रस्म-ए-इंतिज़ार
मुंतज़िरकोउम्रभरशमएँजलानाचाहिए
जज़्बकरलेतेहैंअच्छीसूरतोंकोआइने
आइनोंसेकियातुम्हेंआँखेंमिलानाचाहिए
मेरेउसकेबीचजोहालातकीदीवारहै
मुझकोउसदीवारमेंइकदरबनानाचाहिए
फिरकरम-आगींतबस्सुममेंहैपोशीदासितम
होश-मंदोंकोपहेलीबूझजानाचाहिए
गर्दिश-ए-हालातसेमायूसहोनाकुफ़्रहै
उम्रभरइंसाँकोक़िस्मतआज़मानाचाहिए
मेरीग़ज़लेंहोंगीकलना-महरमोंकेदरमियाँ
उसकीख़ुशबूमेरीग़ज़लोंमेंआनाचाहिए
हमतोक़ाइलहीनहींमहदूद-ए-उल्फ़तके'अलीम'
हमकोउल्फ़तकेलिएसाराज़मानाचाहिए
  - Aleem Usmani
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy