shikast-e-sheesha-e-dil ki sadaa hooñ | शिकस्त-ए-शीशा-ए-दिल की सदा हूँ

  - Alamtaab Tishna
शिकस्त-ए-शीशा-ए-दिलकीसदाहूँ
मैंख़ुदभीख़ुदकोसुननाचाहताहूँ
नहींमेरेलिएक्याऔरकोई
उसीकारास्ताक्यूँँदेखताहूँ
उसीसाहिलपेडूबूँगाजहाँसे
समुंदरकातमाशाकररहाहूँ
चराग़-ए-शोला-ए-सरहूँऔरहवामें
सर-ए-दीवार-ए-जाँरक्खाहुआहूँ
गुज़रनाहैजिसेसहरासेहोकर
मैंउसदरियाकेदुखसेआश्नाहूँ
विसाल-ए-यारकीख़्वाहिशमेंअक्सर
चराग़-ए-शामसेपहलेजलाहूँ
ग़ुनूदासाअ'तोंकीशबसे'तिश्ना'
तवाफ़-ए-आरिज़-ओ-लबकररहाहूँ
  - Alamtaab Tishna
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