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ADARSH AWASTHI
baitha rehta saahil pe par dariyaa paar nahin karta
baitha rehta saahil pe par dariyaa paar nahin karta | बैठा रहता साहिल पे पर दरिया पार नहीं करता
- ADARSH AWASTHI
बैठा
रहता
साहिल
पे
पर
दरिया
पार
नहीं
करता
मतलब
तू
भी
लहरों
से
फिर
मुझ
सेा
प्यार
नहीं
करता
तकते
बैठे
साहिल
पे
हम
क़श्ती
ले
तूफ़ानों
को
पर
वो
इतना
बुजदिल
है
की
हम
पर
वार
नहीं
करता
- ADARSH AWASTHI
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रात
के
जिस्म
में
जब
पहला
पियाला
उतरा
दूर
दरिया
में
मेरे
चाँद
का
हाला
उतरा
Kumar Vishwas
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मैं
एक
ठहरा
हुआ
पुल,
तू
बहता
दरिया
है
तुझे
मिलूँगा
तो
फिर
टूट
कर
मिलूँगा
मैं
Subhan Asad
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जो
उस
तरफ़
से
इशारा
कभी
किया
उस
ने
मैं
डूब
जाऊंगा
दरिया
को
पार
करते
हुए
Ghulam Murtaza Rahi
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दरिया
के
किनारे
पे
मिरी
लाश
पड़ी
थी
और
पानी
की
तह
में
वो
मुझे
ढूँड
रहा
था
Adil Mansuri
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उसी
वक़्त
अपने
क़दम
मोड़
लेना
नदी
पार
से
जब
इशारा
करूँँगा
Siddharth Saaz
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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वो
इतना
शांत
दरिया
था
मगर
जब
गया
तो
ले
गया
सब
कुछ
बहा
के
Siddharth Saaz
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साथ
चलते
जा
रहे
हैं
पास
आ
सकते
नहीं
इक
नदी
के
दो
किनारों
को
मिला
सकते
नहीं
उसकी
भी
मजबूरियाँ
हैं
मेरी
भी
मजबूरियाँ
रोज़
मिलते
हैं
मगर
घर
में
बता
सकते
नहीं
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Bashir Badr
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हम
भी
दरिया
हैं
हमें
अपना
हुनर
मालूम
है
जिस
तरफ़
भी
चल
पड़ेंगे
रास्ता
हो
जाएगा
Bashir Badr
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मुश्किल
है
फिर
भी
माफ
किया
जा
सकता
है
दिल
एक
है
पर
दो
बार
दिया
जा
सकता
है
ADARSH AWASTHI
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हर
सजदे
में
दिल
ये
मेरा
दु'आ
करे
जिस्म
नहीं
वो
रूह
को
मेरी
छुआ
करे
मेरे
संग
औरों
की
बातें
करता
है
उनके
संग
फिर
मेरा
चर्चा
हुआ
करे
जिस
दिन
भी
नम
उसकी
आँखें
हो
जाएँ
पलकों
से
वो
मेरी
पलकें
छुआ
करे
आधा
उनका
आधा
मेरा
रहता
है
जिसका
भी
हो
पूरा
उसका
हुआ
करे
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ADARSH AWASTHI
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यूँँ
तो
मैंने
कब
ही
कुछ
है
माँगा
तुम
सेे
इक
तुमको
ही
जब
माँगा
तो
माँगा
तुम
सेे
ADARSH AWASTHI
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अगर
देता
ख़ुदा
नाचीज़
को
दो
दिल
भी
तो
मुर्शद
रहा
वा'दा
कि
ये
नाचीज़
दोनो
दिल
तुम्हें
देता
ADARSH AWASTHI
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