rafaqaton ka bharam tod jaane vaala nahin | रफ़ाक़तों का भरम तोड़ जाने वाला नहीं

  - Akram Jazib
रफ़ाक़तोंकाभरमतोड़जानेवालानहीं
मुक़ाबलेमेंअगरआयातर-निवालानहीं
पड़ीहुईहैनसबक़ैससेमिलानेकी
किसीनेदश्तमुकम्मलमगरखंगालानहीं
यहाँबुलंदसदाएँलगाग़ुबारउड़ा
दयार-ए-इश्क़हैतहज़ीबकाहवालानहीं
हमारेअहदकेसुक़रातमस्लहत-बींहैं
किसीकेहाथमेंभीज़हरकाप्यालानहीं
सफ़रमेंरहनेसेइसकोक़राररहताहै
येज़ख़्मदिलकाहैपाँवकाकोईछालानहीं
हवाकेहाथलगीख़ुश्बूओंज़रासुनलो
सँभालेकौनअगरफूलनेसँभालानहीं
येजिसनेरिज़्क़कीतंगीपेख़ुद-कुशीकरली
कहींसमाजनेमिलकरतोमारडालानहीं
करेंगेयूँँहीसदाइंतिज़ारसाहिलपर
गुहरतहोंसेसमुंदरनेजोउछालानहीं
येएहतियातपसंदीकहाँसेआईहै
अगरज़बाँपेकोईमस्लहतकातालानहीं
कहानियाँतराशेंख़यालीदुनियाकी
कहाँजहानमेंतफ़रीक़पस्त-ओ-बालानहीं
इजारा-दारियाँक़ाएमहैंकिसलिए'जाज़िब'
कोईहवालाअगरमो'तबरहवालानहीं
  - Akram Jazib
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