apne alfaaz-o-ma'aani se nikal aaya hai | अपने अल्फ़ाज़-ओ-मआ'नी से निकल आया है

  - Akram Jazib
अपनेअल्फ़ाज़-ओ-मआ'नीसेनिकलआयाहै
वोकहानीकीरवानीसेनिकलआयाहै
खींचलाईहैहमेंचाँदनीशबमेंख़ुशबू
साँपभीरातकीरानीसेनिकलआयाहै
ख़ुदकोरू-पोशकियाकितनेहीकिरदारोंमें
फिरभीफ़नकारकहानीसेनिकलआयाहै
जागउट्ठीहैतड़पदूरचलेजानेसे
रास्तानक़्ल-ए-मकानीसेनिकलआयाहै
फूटबहनेलगेठोकरसेफफोलेदिलके
दर्दएहसासकेपानीसेनिकलआयाहै
तजरबेबाँधकेगठड़ीमेंरखेकाँधोंपर
इकबुढ़ापाभीजवानीसेनिकलआयाहै
हिकमतेंफ़िक्र-ओ-तदब्बुरमेंरखीहैं'जाज़िब'
फ़ल्सफ़ाशो'ला-बयानीसेनिकलआयाहै
  - Akram Jazib
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