hisaar-e-qarya-e-khoobaar se nikalte hue | हिसार-ए-क़र्या-ए-खूँबार से निकलते हुए

  - Akhtar Shumar
हिसार-ए-क़र्या-ए-खूँबारसेनिकलतेहुए
येदिलमलूलथाआज़ारसेनिकलतेहुए
बड़ीहीदेरतलकधूपमुझकोछूसकी
तुम्हारेसाया-ए-दीवारसेनिकलतेहुए
किफिरसेतख़्तकोआनाथामेरेक़दमोंमें
मैंपुर-यक़ीनथादरबारसेनिकलतेहुए
शुआ-ए-नूरकेफूटेसेजाँलरज़तीथी
तुम्हारीगर्मी-ए-रुख़्सारसेनिकलतेहुए
तुम्हारेध्यानमेंगुमहोगईथीमहकीहवा
हुदूद-ए-जादा-ए-गुलज़ारसेनिकलतेहुए
मैंलौटआयातुझेछोड़करमगरआधा
वहींरहादर-ओ-दीवारसेनिकलतेहुए
फ़ज़ामेंदेरतलकख़ूबजगमगाते'शुमार'
वोलफ़्ज़शोख़ी-ए-गुफ़्तारसेनिकलतेहुए
  - Akhtar Shumar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy