us ke nazdeek gham-e-tark-e-wafa kuchh bhi nahin | उस के नज़दीक ग़म-ए-तर्क-ए-वफ़ा कुछ भी नहीं

  - Akhtar Shumar
उसकेनज़दीकग़म-ए-तर्क-ए-वफ़ाकुछभीनहीं
मुतमइनऐसाहैवोजैसेहुआकुछभीनहीं
अबतोहाथोंसेलकीरेंभीमिटीजातीहैं
उसकोखोकरतोमिरेपासरहाकुछभीनहीं
चारदिनरहगएमेलेमेंमगरअबकेभी
उसनेआनेकेलिएख़तमेंलिखाकुछभीनहीं
कलबिछड़नाहैतोफिरअहद-ए-वफ़ासोचकेबाँध
अभीआग़ाज़-ए-मोहब्बतहैगयाकुछभीनहीं
मैंतोइसवास्तेचुपहूँकितमाशाबने
तूसमझताहैमुझेतुझसेगिलाकुछभीनहीं
'शुमार'आँखेंइसीतरहबिछाएरखना
जानेकिसवक़्तवोजाएपताकुछभीनहीं
  - Akhtar Shumar
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