mirii aankhoñ se zaahir khun-fishaani ab bhi hoti hai | मिरी आँखों से ज़ाहिर ख़ूँ-फ़िशानी अब भी होती है

  - Akhtar Shirani
मिरीआँखोंसेज़ाहिरख़ूँ-फ़िशानीअबभीहोतीहै
निगाहोंसेबयाँदिलकीकहानीअबभीहोतीहै
सुरूर-आराशराब-ए-अर्ग़वानीअबभीहोतीहै
मिरेक़दमोंमेंदुनियाकीजवानीअबभीहोतीहै
कोईझोंकातोलातीनसीमअतराफ़-ए-कनआँतक
सवाद-ए-मिस्रमेंअम्बर-फ़िशानीअबभीहोतीहै
वोशबकोमुश्क-बूपर्दोंमेंछुपकरहीजातेहैं
मिरेख़्वाबोंपरउनकीमेहरबानीअबभीहोतीहै
कहींसेहाथजाएतोहमकोभीकोईलादे
सुनाहैइसजहाँमेंशादमानीअबभीहोतीहै
हिलालबद्रकेनक़्शेसबक़देतेहैंइंसाँको
किनाकामीबिना-ए-कामरानीअबभीहोतीहै
कहींअग़्यारकेख़्वाबोंमेंछुपछुपकरजातेहों
वोपहलूमेंहैंलेकिनबद-गुमानीअबभीहोतीहै
समझताहैशिकस्त-ए-तौबाअश्क-ए-तौबाकोज़ाहिद
मिरीआँखोंकीरंगतअर्ग़वानीअबभीहोतीहै
वोबरसातेंवोबातेंवोमुलाक़ातेंकहाँहमदम
वतनकीरातहोनेकोसुहानीअबभीहोतीहै
ख़फ़ाहैंफिरभीकरछेड़जातेहैंतसव्वुरमें
हमारेहालपरकुछमेहरबानीअबभीहोतीहै
ज़बाँहीमेंहोतासीरतोमैंक्याकरूँँनासेह
तिरीबातोंसेपैदासरगिरानीअबभीहोतीहै
तुम्हारेगेसुओंकीछाँवमेंइकरातगुज़रीथी
सितारोंकीज़बाँपरयेकहानीअबभीहोतीहै
पस-ए-तौबाभीपीलेतेहैंजाम-ए-ग़ुंचा-ओ-गुलसे
बहारोंमेंजुनूँकीमेहमानीअबभीहोतीहै
कोईख़ुशहोमिरीमायूसियाँफ़रियादकरतीहैं
इलाहीक्याजहाँमेंशादमानीअबभीहोतीहै
बुतोंकोकरदियाथाजिसनेमजबूर-ए-सुख़न'अख़्तर'
लबोंपरवोनवा-ए-आसमानीअबभीहोतीहै
  - Akhtar Shirani
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