tiri jabeen pe mirii subh ka sitaara hai | तिरी जबीं पे मिरी सुब्ह का सितारा है

  - Akhtar Saeed Khan
तिरीजबींपेमिरीसुब्हकासिताराहै
तिरावजूदमिरीज़ातकाउजालाहै
हरीफ़-ए-परतव-ए-महताबहैजमालतिरा
कुछऔरलगताहैदिलकशजोदूरहोताहै
मिरेयक़ीनकीमासूमियतकोमतटोको
मिरीनिगाहमेंहरनक़्शइकतमाशाहै
नज़रतोआएकोईराहज़िंदगानीकी
तमामआलम-ए-इम्काँग़ुबार-ए-सहराहै
आरज़ूसेखुलाहैजुस्तुजूसेखुला
येहुस्न-ए-राज़जोहरशयमेंकार-फ़रमाहै
ग़म-ए-हयातरहाहैहमारागहवारा
येहमसेपूछदिल-ए-दर्दआश्नाक्याहै
चराग़लेकेउसेढूँडनेचलाहूँमैं
जोआफ़्ताबकीमानिंदइकउजालाहै
जोहमकोभूलगएउनकोयादक्यूँँकीजे
तमामरातकोईचुपकेचुपकेकहताहै
कहाँकहाँलिएफिरतीहैज़िंदगीअबतक
मैंउसजगहहूँजहाँधूपहैसायाहै
  - Akhtar Saeed Khan
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