phirti hai zindagi janaaza-b-dosh | फिरती है ज़िंदगी जनाज़ा-ब-दोश

  - Akhtar Saeed Khan
फिरतीहैज़िंदगीजनाज़ा-ब-दोश
बुतभीचुपहैंख़ुदाभीहैख़ामोश
कोईमेरीतरहजिएतोसही
ज़िंदगीदर-गुलूअजलबर-दोश
दीदनीथीयेकाएनातबहुत
हमभीकुछदिनरहेख़राब-ए-होश
घरसेतौफ़-ए-हरमकोनिकलाथा
राहमेंथीदुकान-ए-बादा-फ़रोश
इकतअ'ल्लुक़क़दमकोराहसेहै
मैंआवाराहूँख़ाना-ब-दोश
हमसेग़ाफ़िलनहींहैंअहल-ए-सितम
इकज़राथककेहोगएहैंख़मोश
जीमेंहैकोईआरज़ूकीजे
या'नीबाक़ीहैसरमेंमस्तीहोश
हैयेदुनियाबहुतवसीअ'तोहो
मैंहूँऔरतेराहल्का-ए-आग़ोश
दिलकोरोतेकहाँतलक'अख़्तर'
आख़िर-कारहोगएख़ामोश
  - Akhtar Saeed Khan
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