sun raha hooñ be-sada naghma jo main baa-chashm-e-tar | सुन रहा हूँ बे-सदा नग़्मा जो मैं बा-चश्म-ए-तर

  - Akhtar Saeed Khan
सुनरहाहूँबे-सदानग़्माजोमैंबा-चश्म-ए-तर
चुपकेचुपकेज़िंदगीहँसतीहैमेरेहालपर
अपनीसारीउम्रखोकरमैंनेपायाहैतुम्हें
आओमेरेग़मकेसन्नाटोमिरेनज़दीक-तर
एकदिलथासोहुआहैपाएमाल-ए-आरज़ू
अबकोईरहनुमाहैऔरकोईहम-सफ़र
हरक़दमपरपूछताहूँपाँवकेछालोंसेमैं
येमिरीमंज़िलहैयाबाक़ीहैमेरीरहगुज़र
कौनहैयेजोमिरेदिलमेंहैअबतकमहव-ए-ख़्वाब
ढूँडतेहैंएकमुद्दतसेजिसेशाम-ओ-सहर
बंदहैंवारफ़्तगान-ए-हुस्नपरसबरास्ते
तेरेदरसेमैंअगरउठ्ठूँतोजाऊँगाकिधर
जलरहाहैआतिश-ए-फ़ुर्क़तमेंलेकिनज़िंदाहै
क्यूँँलिएबैठाहैयेइल्ज़ाम'अख़्तर'अपनेसर
  - Akhtar Saeed Khan
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