dil ki raahen dhoondhne jab ham chale | दिल की राहें ढूँडने जब हम चले

  - Akhtar Saeed Khan
दिलकीराहेंढूँडनेजबहमचले
हमसेआगेदीदा-ए-पुर-नमचले
तेज़झोंकाभीहैदिलकोनागवार
तुमसेमसहोकरहवाकमकमचले
थीकभीयूँँक़द्र-ए-दिलइसबज़्ममें
जैसेहाथों-हाथजाम-ए-जमचले
हाएवोआरिज़औरउसपरचश्म-ए-नम
गुलपेजैसेक़तरा-ए-शबनमचले
आमद-ए-सैलाबकावक़्फ़ाथावो
जिसकोयेजानाकिआँसूथमचले
कहतेहैंगर्दिशमेंहैंसातआसमाँ
अज़-सर-ए-नौक़िस्सा-ए-आदमचले
खिलहीजाएगीकभीदिलकीकली
फूलबरसाताहुआमौसमचले
बे-सुतूँछतकेतलेइसधूपमें
ढूँडनेकिसकोयेमेरेग़मचले
कौनजीनेकेलिएमरतारहे
लोसँभालोअपनीदुनियाहमचले
कुछतोहोअहल-ए-नज़रकोपास-ए-दर्द
कुछतोज़िक्र-ए-आबरू-ए-ग़मचले
कुछअधूरेख़्वाबआँखोंमेंलिए
हमभी'अख़्तर'दरहमबरहमचले
  - Akhtar Saeed Khan
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