sair-gaah-e-duniya ka haasil-e-tamaasha kya | सैर-गाह-ए-दुनिया का हासिल-ए-तमाशा क्या

  - Akhtar Saeed Khan
सैर-गाह-ए-दुनियाकाहासिल-ए-तमाशाक्या
रंग-ओ-निकहत-ए-गुलपरअपनाथाइजाराक्या
खेलहैमोहब्बतमेंजानदिलकासौदाक्या
देखिएदिखातीहैअबयेज़िंदगीक्याक्या
जबभीजीउमडआयारोलिएघड़ीभरको
आँसुओंकीबारिशसेमौसमोंकारिश्ताक्या
कबसर-ए-नज़ाराथाहमकोबज़्म-ए-आलमका
यूँँभीदेखकरतुमकोऔरदेखनाथाक्या
दर्दबे-दवाअपनाबख़्तना-रसाअपना
निगाह-ए-बे-परवातुझसेहमकोशिकवाक्या
बे-सवालआँखोंसेमुँहछुपारहेहोक्यूँँ
मेरीचश्म-ए-हैराँमेंहैकोईतक़ाज़ाक्या
हालहैमाज़ीहैवक़्तकातसलसुलहै
रातकाअँधेराक्यासुब्हकाउजालाक्या
जोहैजीमेंकहदीजेउनकेरू-ब-रू'अख़्तर'
अर्ज़-ए-हालकीख़ातिरढूँडिएबहानाक्या
  - Akhtar Saeed Khan
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