zindagi kya hue vo apne zamaane waale | ज़िंदगी क्या हुए वो अपने ज़माने वाले

  - Akhtar Saeed Khan
ज़िंदगीक्याहुएवोअपनेज़मानेवाले
यादआतेहैंबहुतदिलकोदुखानेवाले
रास्तेचुपहैंनसीम-ए-सहरीभीचुपहै
जानेकिससम्तगएठोकरेंखानेवाले
अजनबीबनकेमिलउम्र-ए-गुरेज़ाँहमसे
थेकभीहमभीतिरेनाज़उठानेवाले
किमैंदेखलूँखोयाहुआचेहराअपना
मुझसेछुपकरमिरीतस्वीरबनानेवाले
हमतोइकदिनजिएअपनीख़ुशीसेदिल
औरहोंगेतिरेएहसानउठानेवाले
दिलसेउठतेहुएशोलोंकोकहाँलेजाएँ
अपनेहरज़ख़्मकोपहलूमेंछुपानेवाले
निकहत-ए-सुब्ह-ए-चमनभूलजानाकितुझे
थेहमींनींदसेहररोज़जगानेवाले
हँसकेअबदेखतेहैंचाक-ए-गरेबाँमेरा
अपनेआँसूमिरेदामनमेंछुपानेवाले
किससेपूछूँयेसियहरातकटेगीकिसदिन
सोगएजाकेकहाँख़्वाबदिखानेवाले
हरक़दमदूरहुईजातीहैमंज़िलहमसे
राह-ए-गुम-कर्दाहैंख़ुदराहदिखानेवाले
अबजोरोतेहैंमिरेहाल-ए-ज़बूँपर'अख़्तर'
कलयहीथेमुझेहँसहँसकेरुलानेवाले
  - Akhtar Saeed Khan
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy