maqaam-e-dil bahut ooncha banaa hai | मक़ाम-ए-दिल बहुत ऊँचा बना है

  - Akhtar Orenvi
मक़ाम-ए-दिलबहुतऊँचाबनाहै
कमंद-ए-अक़्लअबतकना-रसाहै
फ़रोग़-ए-इश्क़सेबेताबजल्वे
हरीम-ए-नाज़मेंमहशरबपाहै
मिज़ाज-ए-हुस्नमेंयेदर्द-मंदी
ब-फ़ैज़-ए-इश्क़क्यासेक्याहुआहै
ख़िरदहैजुस्तुजू-ए-सोज़-ए-आतिश
मोहब्बतआरज़ू-ए-बरमलाहै
नवाज़िशउनकीमुहताज-ए-मोहब्बत
मिरीकम-माएगीकाआसराहै
चमनकीनिकहत-अफ़्शानीकाबाइ'से
येमौज-ए-गुलहैयामौज-ए-सबाहै
भलाक्यूँँहोतुझेमेरीज़रूरत
कितूसारेज़मानेकाख़ुदाहै
  - Akhtar Orenvi
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