kabhi to KHvaab men aao ki raat bhari hai | कभी तो ख़्वाब में आओ कि रात भारी है

  - Akhtar Orenvi
कभीतोख़्वाबमेंआओकिरातभारीहै
बुझेचराग़जलाओकिरातभारीहै
मेरीउम्मीदकीदुनियाहैसूनीसूनीसी
ज़रासीआसबँधाओकिरातभारीहै
मिरावजूदउदासीकीएकपरछाई
मिरीहयातपेछाओकिरातभारीहै
नफ़सनफ़समेंतमन्नाकिहिचकियोंकीकसक
रुख़-ए-जमीलदिखाओकिरातभारीहै
येनींदहैज़रादेखोसुकून-ए-मर्गहो
मरीज़-ए-ग़मकोजगाओकिरातभारीहै
ख़मीदापलकोंपेतारोंकाबोझकैसाहै
निगाह-ए-नाज़उठाओकिरातभारीहै
चमन-तराज़ी-ए-चश्म-ए-हसींकीतुमकोक़सम
कफ़नपेफूलसजाओकिरातभारीहै
ख़याल-ए-'अख़्तर'-ए-मरहूमसेभीबाज़आओ
दयार-ए-हुज़्नसेजाओकिरातभारीहै
  - Akhtar Orenvi
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