daar pe chadh ke jo tajdeed-e-wafa hoti hai | दार पे चढ़ के जो तजदीद-ए-वफ़ा होती है

  - Akhtar Orenvi
दारपेचढ़केजोतजदीद-ए-वफ़ाहोतीहै
इसशहादतपेतोसौजानफ़िदाहोतीहै
जिनकोदावा-ए-ख़िरदहोज़राकरदेखेंइश्क़कीराहबहुतहोश-रुबाहोतीहै
दर्दमेंडूबीनिगाहोंकीज़बाँहैगोया
औरबातोंसेगोयेबातजुदाहोतीहै
हुस्नजबसोज़-ए-मोहब्बतसेजिलापाताहै
क्यातजल्लीपस-ए-फ़ानूस-ए-वफ़ाहोतीहै
उनहसींआँखोंमेंहैहसरतअल्ताफ़-ओ-करम
दिलहीजानेयेक़यामतकीअदाहोतीहै
फूलकेदीदा-ए-पुर-नमकायेअंजामब-ख़ैर
पत्तियाँझड़तीहैंशबनमभीख़फ़ाहोतीहै
सुब्हतकहाल-ए-दिल-ए-ज़ारपेरोलो'अख़्तर'
इसघड़ीदर्दकेमारोंकीदवाहोतीहै
  - Akhtar Orenvi
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