na samajh saki jo duniya ye zabaan-e-be-zabaani | न समझ सकी जो दुनिया ये ज़बान-ए-बे-ज़बानी

  - Akhtar Muslimi
समझसकीजोदुनियायेज़बान-ए-बे-ज़बानी
तिराचेहराख़ुदकहेगामिरेक़त्लकीकहानी
येअज़ाब-ए-आसमानीयेइताब-ए-ना-गहानी
हैंकहाँसमझनेवालेमिरेआँसुओंकोपानी
कहींलुटरहाहैख़िर्मनकहींजलरहाहैगुलशन
उसेकिसनेसौंपदीहैयेचमनकीपासबानी
मिरीतुझसेक्याहैनिस्बतमिरातुझसेवास्ताक्या
तूहरीस-ए-लाला-ओ-गुलमैंफ़िदा-ए-बाग़बानी
तुझेनाज़हुस्नपरहैमुझेनाज़इश्क़परहै
तिराहुस्नचंद-रोज़ामिराइश्क़जावेदानी
येवोदिल-रुबाहैदुनियामिरेदोस्तोकिजिसकी
कोईअदानईहैकोईअदापुरानी
कोईउससेकहदे'अख़्तर'ज़राहोशमेंवोआए
रहेगाज़िंदगीभरयेसुरूर-ए-शादमानी
  - Akhtar Muslimi
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