zauq-e-nazar badhaaiye gulzaar dekh kar | ज़ौक़-ए-नज़र बढ़ाइए गुलज़ार देख कर

  - Akhtar Husain Shaafi
ज़ौक़-ए-नज़रबढ़ाइएगुलज़ारदेखकर
उल्फ़तकासौदाकीजिएबाज़ारदेखकर
मैंनेजुनून-ए-इश्क़सेदामनबचालिया
हरबुल-हवसकोतेरापरस्तारदेखकर
मेरेहीदरपेथाकोईसाइलकेरूपमें
हैरत-ज़दारहामुझेनादारदेखकर
नग़्मा-सराहोसकागुलशनमेंअंदलीब
तूफ़ान-ओ-बर्क़-ओ-बादकेआसारदेखकर
बेताबदिलकोऔरतरसतीनिगाहको
बहलासकामैंगुल-ओ-गुलज़ारदेखकर
दिलगुफ़्तुगूकीसम्तझुकाशे'रबनगए
इज़हार-ए-ग़मकोरूहकाग़म-ख़्वारदेखकर
होश-ओ-हवसकीजंगमेंहैरत-ज़दारहा
जज़्बोंकाशोरअक़्लकेअफ़्कारदेखकर
आँखोंसेकाएनातकेआँसूटपकपड़े
शाफ़ीकोइसजहानमेंबीमारदेखकर
यादगईंख़िरदकोवोजन्नतकीलग़्ज़िशें
दिलकाजुनून-ओ-शौक़शरर-बारदेखकर
हाथोंमेंदिलकेपरचम-ए-अफ़्कारदेदिया
इंसानियतकोबरसर-ए-पैकारदेखकर
  - Akhtar Husain Shaafi
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