sad-haif adam ko thukra kar hasti ki ziyaarat kar baithe | सद-हैफ़ अदम को ठुकरा कर हस्ती की ज़ियारत कर बैठे

  - Akhtar Husain Shaafi
सद-हैफ़अदमकोठुकराकरहस्तीकीज़ियारतकरबैठे
नादाँथेहमनादानीमेंजीनेकीहिमाक़तकरबैठे
ख़ालिक़नेनवाज़ारोज़-ए-अज़लकिसतरहहमेंक्याबतलाएँ
लेकिनजोअमानतपाईथीहमउसमेंख़यानतकरबैठे
इसदेसमेंजबहररहज़नकोरहबरकाशरफ़पातेदेखा
क़द्रोंकेमुहाफ़िज़होकरभीक़द्रोंसेबग़ावतकरबैठे
नौ-ख़ेज़गुलोंकेआरिज़परजोमौतकीज़र्दीलेआई
उसबाद-ए-सबासघबराकरतूफ़ाँसेमोहब्बतकरबैठे
वोदौरगयाजबज़ालिमकोमाइल-ब-करमकरतीथीवफ़ा
हमकरकेमोहब्बतदुश्मनसेसामान-ए-क़यामतकरबैठे
आज़ारजानेकितनेथे'शाफ़ी'सेमुदावाक्याहोता
तौहीदकेदीवानेथेमगरअसनामकीताअ'तकरबैठे
  - Akhtar Husain Shaafi
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