koi chaudahveen-raat ka chaand ban kar tumhaare tasavvur men aaya to hogaa | कोई चौदहवीं-रात का चाँद बन कर तुम्हारे तसव्वुर में आया तो होगा

  - Akhtar Azad
कोईचौदहवीं-रातकाचाँदबनकरतुम्हारेतसव्वुरमेंआयातोहोगा
किसीसेतोकीहोगीतुमनेमोहब्बतकिसीकोगलेसेलगायातोहोगा
लबोंसेमोहब्बतकाजादूजगाकेभरीबज़्ममेंसबसेनज़रेंबचाके
निगाहोंकेरस्तेसेदिलमेंसमाकेकिसीनेतुम्हेंभीचुरायातोहोगा
तुम्हारेख़यालोंकीअँगनाइयोंमेंमिरीयादकेफूलमहकेतोहोंगे
कभीअपनीआँखोंकेकाजलसेतुमनेमिरानामलिखकरमिटायातोहोगा
कभीआइनेसेनिगाहेंमिलाकरजोलीहोगीभरपूरअंगड़ाईतूने
तोघबराकेख़ुदतेरीअंगड़ाइयोंनेतिरेहुस्नकोगुदगुदायातोहोगा
निगाहोंमेंशम-ए-तमन्नाजलाकरतकीहोंगीतुमनेभीराहेंकिसीकी
किसीनेतोवा'दाकियाहोगातुमसेकिसीनेतोतुमकोरुलायातोहोगा
जुदाहोगयाहोगाजबकोईतुमसेदियाहोगाजबतुमकोधोकाकिसीने
हमारीवफ़ायादआईतोहोगीहमेंअपनेनज़दीकपायातोहोगा
  - Akhtar Azad
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