suna ke apne aish-e-taam ki roodaad ke tukde | सुना के अपने ऐश-ए-ताम की रूदाद के टुकड़े

  - Akhtar Ansari
सुनाकेअपनेऐश-ए-तामकीरूदादकेटुकड़े
उड़ादूँगाकिसीदिनचर्ख़कीबेदादकेटुकड़े
असीरीकोअताकरकेअसीरीकाशरफ़हमने
उड़ाडालेख़ुदअपनीफ़ितरत-ए-आज़ादकेटुकड़े
कहाँकाआदमीइंसानकैसामा-हसलयेहै
कहींअश्ख़ासकेपुर्ज़ेकहींअफ़रादकेटुकड़े
तबाहीकेमज़ोंसेभीगएअबवाए-महरूमी
समेटूँगाकहाँतकहसरत-ए-बर्बादकेटुकड़े
येसीनातल्ख़यादोंकाख़ज़ीनाहीसहीलेकिन
बहुतचुभतेहैंदिलमेंइकनुकीलीयादकेटुकड़े
तुमअच्छेहीसहीमेराबुराहोनाभीहैबर-हक़
किहमसबहैंकिसीमजमूअ-ए-अज़दादकेटुकड़े
हमेंलख़्त-ए-जिगरखानेकोहरगिज़कमथा'अख़्तर'
मगरक़िस्मतमेंलिक्खेथेजहानाबादकेटुकड़े
  - Akhtar Ansari
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