kisi se ladaayein nazar aur jhelen mohabbat ke gham itni furqat kahaan | किसी से लड़ाएँ नज़र और झेलें मोहब्बत के ग़म इतनी फ़ुर्सत कहाँ

  - Akhtar Ansari
किसीसेलड़ाएँनज़रऔरझेलेंमोहब्बतकेग़मइतनीफ़ुर्सतकहाँ
उठाएँकिसीमाह-पैकरहसीनाकेजौर-ओ-सितमइतनीफ़ुर्सतकहाँ
ज़मानेकीबे-रहमियोंकेतसद्दुक़दिमाग़-ए-नशात-ओ-अलमहीनहीं
दिलअपनाकरेआरज़ू-ए-जफ़ायाउमीद-ए-करमइतनीफ़ुर्सतकहाँ
डुबोदेंमय-ए-नाबकीमस्तियोंमेंफ़लाकतकेनक्बतकेएहसासको
बनालेंकिसीआमियानासेकूज़ेहीकोजाम-ए-जमइतनीफ़ुर्सतकहाँ
होंआज़ाद-ए-अफ़्कारलेकिनतफ़क्कुरमेंडूबेहुएसेरहेंरातदिन
तबीअतकीबे-वज्हअफ़्सुर्दगीकेमज़ेलूटेंहमइतनीफ़ुर्सतकहाँ
माज़ीहमारामुस्तक़बिलअपनाकुछइसतौरसेहर्फ़-ए-इमरोज़हैं
ग़म-ए-दोशयाफ़िक्र-ए-फ़र्दामें'अख़्तर'करेंसरकोख़मइतनीफ़ुर्सतकहाँ
  - Akhtar Ansari
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