main zer-e-saaya kahii mahv-e-khwaab tha bhi nahin | मैं ज़ेर-ए-साया कहीं महव-ए-ख़्वाब था भी नहीं

  - Akhlaque Bandvi
मैंज़ेर-ए-सायाकहींमहव-ए-ख़्वाबथाभीनहीं
किकेधूपजगातीमैंजागताभीनहीं
हरीम-ए-नाज़मिरीदस्तरससेदूरतोहै
मिरेजहान-ए-तख़य्युलसेमावराभीनहीं
यहीहैअद्लतोऐसेनिज़ाम-ए-अद्लपेख़ाक
हैफ़र्द-ए-जुर्मभीआएदमिरीख़ताभीनहीं
हमअपनीजानकेदुश्मनकोअपनादोस्तकहें
हमारेपासकोईऔररास्ताभीनहीं
हमकेअपनेघरोंमेंसुकूँसेबैठगए
बईं-हमाकोईख़तराअभीटलाभीनहीं
कहाँपेलाईहैयेशब-गज़ीदगीहमको
चराग़बुझभीगएमुश्तइ'लहवाभीनहीं
असाकोडालदेंदरियामेंरास्ताहोजाए
हमारेपासकोईऐसामो'जिज़ाभीनहीं
इसीजहानमें'अख़लाक़'ऐसेलोगभीहैं
जोनेकभीहैंऔरउनकाकोईख़ुदाभीनहीं
  - Akhlaque Bandvi
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