kabhi jo aankhoñ men pal-bhar ko KHvaab jaagte hain | कभी जो आँखों में पल-भर को ख़्वाब जागते हैं

  - Akhlaque Bandvi
कभीजोआँखोंमेंपल-भरकोख़्वाबजागतेहैं
तोफिरमहीनोंमुसलसलअज़ाबजागतेहैं
किसीकेलम्सकीतासीरहैकिबरसोंबा'द
मिरीकिताबोंमेंअबभीगुलाबजागतेहैं
बुराईकुछतोयक़ीननहैबे-हिजाबीमें
मगरवोफ़ित्नेजोज़ेर-ए-नक़ाबजागतेहैं
सितम-शिआ'रोंहमारातुमइम्तिहानलो
हमारेसब्रसेसदइंक़लाबजागतेहैं
हमेंख़ुदअपनीसमाअ'तपेशरमआतीहै
किमिम्बरोंसेअबऐसेख़िताबजागतेहैं
येनींदलेतीहै'अख़लाक़'वोख़िराजकिबस
जोख़ूबसोतेहैंहोकरख़राबजागतेहैं
  - Akhlaque Bandvi
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