na gul khandaan na bulbul naghma-khwaan hai | न गुल ख़ंदाँ न बुलबुल नग़्मा-ख़्वाँ है

  - Akhlaque Bandvi
गुलख़ंदाँबुलबुलनग़्मा-ख़्वाँहै
अरेगुलचींयेनज़्म-ए-गुलसिताँहै
चमनमेंफिरबनाताहूँनशेमन
सुनाहैमुज़्महिलबर्क़-ए-तपाँहै
जिसेकहतेथेहमसोनेकीचिड़िया
येभारतक्यावहीहिन्दोस्ताँहै
सदाआतीहैपैहमठोकरोंसे
येसंग-ए-रहगुज़रमंज़िल-रसाँहै
ग़लतसम्त-ए-सफ़रकाहैयेहासिल
जादाहैमंज़िलकानिशाँहै
मुझेतार-ए-शब-ए-फ़ुर्क़तकाग़मक्या
बहमइकशम्अ'-ए-याद-ए-रफ़्तगाँहै
सुनाएँकिसकोहाल-ए-दिलहमअपना
महरमहैकोईराज़-दाँहै
तिरीयादोंकामौसमहैनज़रमें
कहींसहरामेंइकदरियारवाँहै
  - Akhlaque Bandvi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy