kisi ke roo-e-gham-zada pe jab kabhi nazar gaii | किसी के रू-ए-ग़म-ज़दा पे जब कभी नज़र गई

  - Akhlaque Bandvi
किसीकेरू-ए-ग़म-ज़दापेजबकभीनज़रगई
येमेरादिलतड़पउठायामेरीआँखभरगई
हमारीउम्र-ए-रफ़्ताक्यामलूलक्याशगुफ़्ताक्या
भलीथीयाबुरीथीजोगुज़रगईगुज़रगई
वफ़ाकेएकमोड़परगयाथाकोईछोड़कर
हयातजैसेबसउसीमक़ामपरठहरगई
कमालख़द्द-ओ-ख़ालथेसियहख़मीदाबालथे
वोतमकनतसाहिब-ए-जमालअबकिधरगई
जोराह-रौहैंकम-नज़रसफ़रभीउनकाक्यासफ़र
वहीहैउनकीहदजहाँतकउनकीरहगुज़रगई
बलाकीसख़्तजानथीज़मींपेआसमानथी
वहीयेक़ौमहैअदूकीसरज़निशसेमरगई
उजड़गयाथागुल्सिताँब-दस्त-ए-मौसम-ए-ख़िज़ाँ
सोफिरबहारगईकलीकलीसँवरगई
  - Akhlaque Bandvi
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