junoon-e-ishq ka jo kuchh hua anjaam kya kahiye | जुनून-ए-इश्क़ का जो कुछ हुआ अंजाम क्या कहिए

  - Akhgar Mushtaq Raheem Aabadi
जुनून-ए-इश्क़काजोकुछहुआअंजामक्याकहिए
किसीसेअबयेरूदाद-ए-दिल-ए-नाकामक्याकहिए
फिरीक्यूँँकरनिगाह-ए-साक़ी-ए-गुलफ़ामक्याकहिए
भरीमहफ़िलमेंअस्बाब-ए-शिकस्त-ए-जामक्याकहिए
येकैसीदिलमेंहैइकज़ुल्मत-ए-बे-नामक्याकहिए
बुझाक्यूँँदफ़अ'तनअज़-ख़ुदचराग़-ए-शामक्याकहिए
तग़ाफ़ुलपरवोदोहर्फ़-ए-शिकायतभीक़यामतथे
ज़मानेभरकेहमपरगएइल्ज़ामक्याकहिए
मिरादर्द-ए-निहाँभीआजरुस्वा-ए-ज़मानाहै
इकआह-ए-ज़ेर-ए-लबभीबनगईदुश्नामक्याकहिए
दर-ओ-दीवारपरछाएहुएहैंयासकेमंज़र
दयार-ए-नामुरादीकेयेसुब्ह-ओ-शामक्याकहिए
जहान-ए-आरज़ूभीरफ़्तारफ़्ताहोचलावीराँ
इकआग़ाज़-ए-हसींकाआहयेअंजामक्याकहिए
उमीद-ओ-यासमेंयेरोज़-ओ-शबकीकश्मकशतौबा
ब-हर-लम्हाफ़रेब-ए-गर्दिश-ए-अय्यामक्याकहिए
येकिसकेदरसेता'नेमिलरहेहैंसज्दा-ओ-सरको
येकिसदरपरहैज़ौक़-ए-बंदगीबदनामक्याकहिए
कहाँकाशिकवा-ए-ग़महमतोबसशुक्र-ए-सितमकरते
मगरशुक्र-ए-सितमकाभीहैजोअंजामक्याकहिए
अदा-ए-बद-गुमानीभीसरिश्त-ए-इश्क़हैलेकिन
येक्यूँँकरबनगईमिनजुमला-ए-इल्ज़ामक्याकहिए
रहेंगेहश्रतकमम्नून-ए-एहसान-ए-दिल-आज़ारी
ख़ुलूस-ए-इश्क़परयेक़ीमतीइनआ'मक्याकहिए
बढ़ीजातीहैअबतोऔरभीकुछदूरी-ए-मंज़िल
अचानकनौ-ब-नौ-दुश्वारी-हर-गामक्याकहिए
वोअपनीसई-ए-तजदीद-ए-जुनूँभीराएगाँठहरी
बसअबआगेमआल-ए-हसरत-ए-नाकामक्याकहिए
समझेआजतकरंग-ए-मिज़़ाज-ए-यार-ए-बे-परवा
मगरफिरभीज़बाँपरहैउसीकानामक्याकहिए
  - Akhgar Mushtaq Raheem Aabadi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy