KHud nazaaron pe nazaaron ko hañsi aati hai | ख़ुद नज़ारों पे नज़ारों को हँसी आती है

  - Akhgar Mushtaq Raheem Aabadi
ख़ुदनज़ारोंपेनज़ारोंकोहँसीआतीहै
बाग़बानोंपेबहारोंकोहँसीआतीहै
अबयेक्यूँँज़िक्र-ए-बहाराँपेचमनमेंअक्सर
फूलतोफूलहैंख़ारोंकोहँसीआतीहै
मेहर-ओ-इख़्लासकीदुनियामेंयेक्याबातहुई
आजयारोंहीपेयारोंकोहँसीआतीहै
ऐसीबे-जानसीहैमेरेहरीफ़ोंकीहँसी
जैसेतूफ़ाँपेकिनारोंकोहँसीआतीहै
क्याकरेआहवोबेचारामुसाफ़िरजिसपर
आपकीराह-गुज़ारोंकोहँसीआतीहै
कोईजबचाँदसितारोंसेहोमसरूफ़-ए-सुख़न
किसक़दरचाँदसितारोंकोहँसीआतीहै
ख़ैरहोख़ैरमशिय्यतकेइरादोंकीक़सम
आजतक़दीरकेमारोंकोहँसीआतीहै
हाएकिसमोड़पेआयाहैअबअफ़्साना-ए-ग़म
मेरेअफ़्साना-निगारोंकोहँसीआतीहै
हमहैंमहरूम-ए-मसर्रततोकोईबातनहीं
येभीक्याकमहैसहारोंकोहँसीआतीहै
गर्दिश-ए-वक़्तनेक्याफिरकोईसूरतबदली
यायूँँहीवक़्त-गुज़ारोंकोहँसीआतीहै
शायद'अख़्गर'हीकीतौबाकीख़बरहैयारो
आजसाक़ीकेइशारोंकोहँसीआतीहै
  - Akhgar Mushtaq Raheem Aabadi
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