phir gaii aap ki do din men tabi'at kaisi | फिर गई आप की दो दिन में तबीअ'त कैसी

  - Akbar Allahabadi
फिरगईआपकीदोदिनमेंतबीअ'तकैसी
येवफ़ाकैसीथीसाहबयेमुरव्वतकैसी
दोस्तअहबाबसेहँसबोलकेकटजाएगीरात
रिंद-ए-आज़ादहैंहमकोशब-ए-फ़ुर्क़तकैसी
जिसहसींसेहुईउल्फ़तवहीमाशूक़अपनाइश्क़किसचीज़कोकहतेहैंतबीअ'तकैसी
हैजोक़िस्मतमेंवहीहोगाकुछकमसिवा
आरज़ूकहतेहैंकिसचीज़कोहसरतकैसी
हालखुलतानहींकुछदिलकेधड़कनेकामुझे
आजरहरहकेभरआतीहैतबीअ'तकैसी
कूचा-ए-यारमेंजातातोनज़ाराकरता
क़ैसआवाराहैजंगलमेंयेवहशतकैसी
  - Akbar Allahabadi
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