halke nahin hain zulf ke halke hain jaal ke | हल्क़े नहीं हैं ज़ुल्फ़ के हल्क़े हैं जाल के

  - Akbar Allahabadi
हल्क़ेनहींहैंज़ुल्फ़केहल्क़ेहैंजालके
हाँनिगाह-ए-शौक़ज़रादेख-भालके
पहुँचेहैंता-कमरजोतिरेगेसू-ए-रसा
मा'नीयेहैंकमरभीबराबरहैबालके
बोस-ओ-कनार-ओ-वस्ल-ए-हसीनाँहैख़ूबशग़्ल
कमतरबुज़ुर्गहोंगेख़िलाफ़इसख़यालके
क़ामतसेतेरेसाने-ए-क़ुदरतनेहसीं
दिखलादियाहैहश्रकोसाँचेमेंढालके
शान-ए-दिमाग़इश्क़केजल्वेसेयेबढ़ी
रखताहैहोशभीक़दमअपनेसँभालके
ज़ीनतमुक़द्दमाहैमुसीबतकादहरमें
सबशम्अ'कोजलातेहैंसाँचेमेंढालके
हस्तीकेहक़केसामनेक्याअस्ल-ए-ईन-ओ-आँ
पुतलेयेसबहैंआपकेवहम-ओ-ख़यालके
तलवारलेकेउठताहैहरतालिब-ए-फ़रोग़
दौर-ए-फ़लकमेंहैंयेइशारेहिलालके
पेचीदाज़िंदगीकेकरोतुममुक़द्द
में
दिखलाहीदेगीमौतनतीजानिकालके
  - Akbar Allahabadi
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