bahut raha hai kabhi lutf-e-yaar ham par bhi | बहुत रहा है कभी लुत्फ़-ए-यार हम पर भी

  - Akbar Allahabadi
बहुतरहाहैकभीलुत्फ़-ए-यारहमपरभी
गुज़रचुकीहैयेफ़स्ल-ए-बहारहमपरभी
उरूस-ए-दहरकोआयाथाप्यारहमपरभी
येबेसवाथीकिसीशबनिसारहमपरभी
बिठाचुकाहैज़मानाहमेंभीमसनदपर
हुआकिएहैंजवाहिरनिसारहमपरभी
अदूकोभीजोबनायाहैतुमनेमहरम-ए-राज़
तोफ़ख़्रक्याजोहुआए'तिबारहमपरभी
ख़ताकिसीकीहोलेकिनखुलीजोउनकीज़बाँ
तोहोहीजातेहैंदोएकवारहमपरभी
हमऐसेरिंदमगरयेज़मानाहैवोग़ज़ब
किडालहीदियादुनियाकाबारहमपरभी
हमेंभीआतिश-ए-उल्फ़तजलाचुकी'अकबर'
हरामहोगईदोज़ख़कीनारहमपरभी
  - Akbar Allahabadi
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