guzar gaii hai abhii saaat-e-guzishta bhi | गुज़र गई है अभी साअत-ए-गुज़िश्ता भी

  - Ajmal Siraj
गुज़रगईहैअभीसाअत-ए-गुज़िश्ताभी
नज़रउठाकिगुज़रजाएगायेलम्हाभी
बहुतक़रीबसेहोकरगुज़रगईदुनिया
बहुतक़रीबसेदेखाहैयेतमाशाभी
गुज़ररहेहैंजोबार-ए-नज़रउठाएहुए
येलोगमहव-ए-तमाशाभीहैंतमाशाभी
वोदिनभीथेकितिरीख़्वाब-गींनिगाहोंसे
पुकारतीथीमुझेज़िंदगीभीदुनियाभी
जोबे-सबाती-ए-आलमपेबहसथीसर-ए-बज़्म
मैंचुपरहाकिमुझेयादथावोचेहराभी
कभीतोचाँदभीउतरेगादिलकेआँगनमें
कभीतोमौजमेंआएगायेकिनाराभी
निकालदिलसेगएमौसमोंकीयाद'अजमल'
तिरीतलाशमेंइमरोज़भीहैफ़र्दाभी
  - Ajmal Siraj
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