may-khaane par kaale baadal jab ghir ghir kar aate hain | मय-ख़ाने पर काले बादल जब घिर घिर कर आते हैं

  - Ajiz Matvi
मय-ख़ानेपरकालेबादलजबघिरघिरकरआतेहैं
हमभीआँखोंकेपैमानेभरभरकरछलकातेहैं
मैंजिनकोअपनाकहताहूँकबवोमिरेकामआतेहैं
येसारासंसारहैसपनासबझूटेरिश्ते-नातेहैं
तन्हाईकेबोझललम्हेहमइसतरहबितातेहैं
दिलहमकोदेताहैतसल्लीहमदिलकोसमझातेहैं
जीवनकीगुत्थीकासुलझनाकामहैइकना-मुम्किनसा
गिर्हेंपड़तीहीजातीहैंहमजितनासुलझातेहैं
उनकीक़िस्मतमेंजलनाहैकौनउनसेकहताहैजलें
परवानेदीपकपरकरअपने-आपजलजातेहैं
जीवनबीतालेकिनअबतकमैंसमझपायायेभेद
बीतेदिनोंकीयादआतेहीआँसूक्यूँँभरआतेहैं
वोजबअपनासरढकतेहैंखुलजातेहैंउनकेपैर
जोअपनीचादरसेज़ियादापैरअपनेफैलातेहैं
होताहैमहसूसये'आजिज़'शायदउसनेदस्तकदी
तेज़हवाकेझोंकेजबदरवाज़ेसेटकरातेहैं
  - Ajiz Matvi
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