bikhra hooñ jab main KHud yahaañ koi mujhe gir | बिखरा हूँ जब मैं ख़ुद यहाँ कोई मुझे गिराए क्यूँँ

  - Ajay Sahaab
बिखराहूँजबमैंख़ुदयहाँकोईमुझेगिराएक्यूँँ
पहलेसेराखराखहूँफिरभीकोईबुझाएक्यूँँ
ईसावोनबीकोईअदनासाआदमीकोई
फिरभीसलीब-ए-दर्दकोसरपेकोईउठाएँक्यूँँ
सारेजोग़म-गुसारथेकबकेरक़ीबबनचुके
ऐसेमेंदोस्तोंकोईअपनायेग़मसुनाएक्यूँँ
यकतावोज़ात-ए-अकबरीदिलयेहक़ीरोअसग़री
इतनीवसीअ'शयभलादिलमेंमिरेसमाएक्यूँँ
पलताहमारेख़ूँसेहैइश्क़मगरअदूसेहै
अपनानहींजोबे-वफ़ाहमकोयूँँआज़माएक्यूँँ
सुब्हकावक़्तआएतोख़ुदहीबुझेगायेचराग़
इसकोसहरसपेशतरकोईमगरबुझाएक्यूँँ
जिसपरगिरीहैबर्क़भीजिसपेहवाकीहैनज़र
शाख़ोंमेंऐसी'सहाब'घरभीकोईबनाएक्यूँँ
  - Ajay Sahaab
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