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ain naqvi
ba-khuda aap bhi nahin hain jee
ba-khuda aap bhi nahin hain jee | बा-ख़ुदा आप भी नहीं हैं जी
- ain naqvi
बा-ख़ुदा
आप
भी
नहीं
हैं
जी
पारसा
आप
भी
नहीं
हैं
जी
एक
ही
बार
हैं
अगर
हम
तो
बारहा
आप
भी
नहीं
हैं
जी
शहर
सारा
अगर
रुकावट
है
रास्ता
आप
भी
नहीं
हैं
जी
अपनी
आदत
के
हाथ
हैं
मजबूर
बे-वफ़ा
आप
भी
नहीं
हैं
जी
हम
गुनहगार
हैं
तो
फिर
क्या
है
पारसा
आप
भी
नहीं
हैं
जी
आदमी
हैं
हमें
ये
है
एहसास
और
ख़ुदा
आप
भी
नहीं
हैं
जी
- ain naqvi
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कोई
हाथ
भी
न
मिलाएगा
जो
गले
मिलोगे
तपाक
से
ये
नए
मिज़ाज
का
शहर
है
ज़रा
फ़ासले
से
मिला
करो
Bashir Badr
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कोई
शहर
था
जिसकी
एक
गली
मेरी
हर
आहट
पहचानती
थी
मेरे
नाम
का
इक
दरवाज़ा
था
इक
खिड़की
मुझको
जानती
थी
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Ali Zaryoun
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अनोखी
वज़्अ
है
सारे
ज़माने
से
निराले
हैं
ये
'आशिक़
कौन
सी
बस्ती
के
या-रब
रहने
वाले
हैं
Allama Iqbal
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इस
शहर
में
किस
से
मिलें
हम
सेे
तो
छूटीं
महफ़िलें
हर
शख़्स
तेरा
नाम
ले
हर
शख़्स
दीवाना
तिरा
Ibn E Insha
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सुना
है
लोग
उसे
आँख
भर
के
देखते
हैं
सो
उस
के
शहर
में
कुछ
दिन
ठहर
के
देखते
हैं
Ahmad Faraz
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हमने
पर्चे
आँसुओं
से
भर
दिए
और
तुमने
इतने
कम
नंबर
दिए
ऊंचे
नीचे
घर
थे
बस्ती
में
बहुत
जलजले
ने
सब
बराबर
कर
दिए
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Zubair Ali Tabish
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आदत
सी
बना
ली
है
तुमने
तो
'मुनीर'
अपनी
जिस
शहर
में
भी
रहना
उकताए
हुए
रहना
Muneer Niyazi
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चैन
की
बाँसुरी
बजाइये
आप
शहर
जलता
है
और
गाइये
आप
हैं
तटस्थ
या
कि
आप
नीरो
हैं
असली
सूरत
ज़रा
दिखाइये
आप
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Gorakh Pandey
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तुझे
कैसे
इल्म
न
हो
सका
बड़ी
दूर
तक
ये
ख़बर
गई
तिरे
शहर
ही
की
ये
शाएरा
तिरे
इंतिज़ार
में
मर
गई
Mumtaz Naseem
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सावन-रुत
और
उड़ती
पुर्वा
तेरे
नाम
धूप-नगर
से
है
ये
तोहफ़ा
तेरे
नाम
Tajdar Adil
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क्या
क्या
इन-बॉक्स
में
उगलते
हैं
ये
जो
बन
कर
शरीफ़
बैठे
हैं
आप
मौका-परस्त
नईं
हैं
सो
आप
को
एक
मौक़ा
देते
हैं
दिल
तिरे
मुँह
पे
मारने
के
लिए
उस
के
मैसेज
सँभाल
रक्खे
हैं
खेल
खेलेंगे
आप
हम
से
भी
हम
तो
बचपन
से
साथ
खेले
हैं
सुख
की
खिड़की
या
ग़म
का
दरवाज़ा
आप
दिल
में
कहाँ
से
आए
हैं
कुछ
तो
मुझ
से
बुरा
किया
होगा
आप
जो
मुझ
को
अपने
लगते
हैं
ख़्वाब
आते
रहें
हमें
उस
के
फूल
तकिए
पे
रख
के
सोते
हैं
उस
ने
यूँँ
कह
दिया
तो
उस
ने
यूँँ
छोटे
लोगों
के
दुख
भी
छोटे
हैं
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ain naqvi
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मैं
बहुत
ख़ुश
हूँ
सब
को
लगता
है
किस
सफ़ाई
से
झूट
बोला
है
सारे
तूफ़ान
थम
गए
यक-दम
उस
ने
इतना
कहा
वो
मेरा
है
मिल
गया
है
तो
छोड़
ना
जाए
आज-कल
दिल
को
एक
धड़का
है
तुम
मिरी
आख़िरी
मोहब्बत
हो
जाने
किस
किस
से
रोज़
कहता
है
ये
मोहब्बत
नहीं
कि
झूटी
हो
तुम
से
नफ़रत
का
सच्चा
रिश्ता
है
मैं
ने
समझा
है
ज़िंदगी
जिस
को
दूसरों
का
भी
इस
में
हिस्सा
है
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मुझ
में
कुछ
फूल
क्या
खिले
तेरे
लोग
नाराज़
हो
गए
मुझ
से
फिर
बताते
कि
कैसे
चलना
है
दो
क़दम
पहले
साथ
तो
चलते
ये
ख़ुलासा
है
एक
चैप्टर
का
तुम
कहानी
में
देर
से
आए
इस
लिए
मैं
ने
फ़ासला
रक्खा
सब
मनाज़िर
हैं
दूर
से
अच्छे
जान-लेवा
है
ये
अधूरा
पन
आ
गए
थे
तो
ठीक
से
आते
ख़ुद
को
बीमार
कर
दिया
मशहूर
ताकि
वो
मुझ
से
राब्ता
कर
ले
हो
के
मबहूत
हो
गए
तस्वीर
तेरी
तस्वीर
देखने
वाले
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रौशनी
ले
के
तीरगी
ढूँडी
तुझ
को
पा
कर
तिरी
कमी
ढूँडी
उन
हसीनों
से
फेर
कर
आँखें
तू
ने
क्यूँँ
मुझ
सी
सर-फिरी
ढूँडी
ख़्वाब
जन्नत
के
देखने
वाले
तू
ने
क्यूँँ
लड़की
दोज़ख़ी
ढूँडी
जिस
को
मज़हब
से
कुछ
नहीं
लेना
बीवी
उस
ने
भी
मज़हबी
ढूँडी
मीर
साहब
ने
इश्क़
फ़रमाया
और
न्यूटन
ने
ग्रेविटी
ढूँडी
इश्क़
है
नौकरी
नहीं
है
मियाँ
एक
छूटी
तो
दूसरी
ढूँडी
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याद
आता
रहे
तो
अच्छा
है
ज़ख़्म
ताज़ा
रहे
तो
अच्छा
है
एक
धोका
है
दोनों
जानिब
से
पर
ये
चलता
रहे
तो
अच्छा
है
वर्ना
कुछ
और
रास्ते
भी
हैं
कोई
अच्छा
रहे
तो
अच्छा
है
ऑनलाइन
रहे
मैसेंजर
पर
दिल
धड़कता
रहे
तो
अच्छा
है
वर्ना
हम
से
बुरा
नहीं
कोई
वो
हमारा
रहे
तो
अच्छा
है
रोज़
आता
रहे
वो
खिड़की
में
काम
चलता
रहे
तो
अच्छा
है
आता
जाता
रहे
वो
छुट्टियों
में
गाँव
महका
रहे
तो
अच्छा
है
ज़ख़्म
रिसता
रहे
तो
बेहतर
है
शे'र
होता
रहे
तो
अच्छा
है
एक
धोका
सही
तिरा
होना
पर
ये
धोका
रहे
तो
अच्छा
है
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