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ain naqvi
mujh men kuchh phool kya khile tere
mujh men kuchh phool kya khile tere | मुझ में कुछ फूल क्या खिले तेरे
- ain naqvi
मुझ
में
कुछ
फूल
क्या
खिले
तेरे
लोग
नाराज़
हो
गए
मुझ
से
फिर
बताते
कि
कैसे
चलना
है
दो
क़दम
पहले
साथ
तो
चलते
ये
ख़ुलासा
है
एक
चैप्टर
का
तुम
कहानी
में
देर
से
आए
इस
लिए
मैं
ने
फ़ासला
रक्खा
सब
मनाज़िर
हैं
दूर
से
अच्छे
जान-लेवा
है
ये
अधूरा
पन
आ
गए
थे
तो
ठीक
से
आते
ख़ुद
को
बीमार
कर
दिया
मशहूर
ताकि
वो
मुझ
से
राब्ता
कर
ले
हो
के
मबहूत
हो
गए
तस्वीर
तेरी
तस्वीर
देखने
वाले
- ain naqvi
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नज़र
से
नज़र
भर
नज़र
क्या
मिली
ख़िज़ाँ
में
खिली
इक
कली
फूल
की
Sandeep dabral 'sendy'
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वैसे
तो
ज़ेवरों
की
ज़रूरत
नहीं
तुझे
फिर
भी
अगर
ये
फूल
तेरे
काम
आ
सके
Charagh Sharma
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फूलों
की
सेज
पर
ज़रा
आराम
क्या
किया
उस
गुल-बदन
पे
नक़्श
उठ
आए
गुलाब
के
Adil Mansuri
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पैर
के
छालों
में
चुभते
हैं
हजारों
काँटें
फूल
तब
बाग
में
शायान
हुआ
करते
हैं
Aves Sayyad
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चराग़
दिल
का
मुक़ाबिल
हवा
के
रखते
हैं
हर
एक
हाल
में
तेवर
बला
के
रखते
हैं
Hastimal Hasti
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वो
शाख़
है
न
फूल,
अगर
तितलियाँ
न
हों
वो
घर
भी
कोई
घर
है
जहाँ
बच्चियाँ
न
हों
Bashir Badr
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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सर
पर
हवा-ए-ज़ुल्म
चले
सौ
जतन
के
साथ
अपनी
कुलाह
कज
है
उसी
बाँकपन
के
साथ
Majrooh Sultanpuri
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हवा
जब
चली
फड़फड़ा
कर
उड़े
परिंदे
पुराने
महल्लात
के
Muneer Niyazi
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चराग़ों
को
उछाला
जा
रहा
है
हवा
पर
रौब
डाला
जा
रहा
है
Rahat Indori
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क्या
क्या
इन-बॉक्स
में
उगलते
हैं
ये
जो
बन
कर
शरीफ़
बैठे
हैं
आप
मौका-परस्त
नईं
हैं
सो
आप
को
एक
मौक़ा
देते
हैं
दिल
तिरे
मुँह
पे
मारने
के
लिए
उस
के
मैसेज
सँभाल
रक्खे
हैं
खेल
खेलेंगे
आप
हम
से
भी
हम
तो
बचपन
से
साथ
खेले
हैं
सुख
की
खिड़की
या
ग़म
का
दरवाज़ा
आप
दिल
में
कहाँ
से
आए
हैं
कुछ
तो
मुझ
से
बुरा
किया
होगा
आप
जो
मुझ
को
अपने
लगते
हैं
ख़्वाब
आते
रहें
हमें
उस
के
फूल
तकिए
पे
रख
के
सोते
हैं
उस
ने
यूँँ
कह
दिया
तो
उस
ने
यूँँ
छोटे
लोगों
के
दुख
भी
छोटे
हैं
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ain naqvi
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मैं
बहुत
ख़ुश
हूँ
सब
को
लगता
है
किस
सफ़ाई
से
झूट
बोला
है
सारे
तूफ़ान
थम
गए
यक-दम
उस
ने
इतना
कहा
वो
मेरा
है
मिल
गया
है
तो
छोड़
ना
जाए
आज-कल
दिल
को
एक
धड़का
है
तुम
मिरी
आख़िरी
मोहब्बत
हो
जाने
किस
किस
से
रोज़
कहता
है
ये
मोहब्बत
नहीं
कि
झूटी
हो
तुम
से
नफ़रत
का
सच्चा
रिश्ता
है
मैं
ने
समझा
है
ज़िंदगी
जिस
को
दूसरों
का
भी
इस
में
हिस्सा
है
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याद
आता
रहे
तो
अच्छा
है
ज़ख़्म
ताज़ा
रहे
तो
अच्छा
है
एक
धोका
है
दोनों
जानिब
से
पर
ये
चलता
रहे
तो
अच्छा
है
वर्ना
कुछ
और
रास्ते
भी
हैं
कोई
अच्छा
रहे
तो
अच्छा
है
ऑनलाइन
रहे
मैसेंजर
पर
दिल
धड़कता
रहे
तो
अच्छा
है
वर्ना
हम
से
बुरा
नहीं
कोई
वो
हमारा
रहे
तो
अच्छा
है
रोज़
आता
रहे
वो
खिड़की
में
काम
चलता
रहे
तो
अच्छा
है
आता
जाता
रहे
वो
छुट्टियों
में
गाँव
महका
रहे
तो
अच्छा
है
ज़ख़्म
रिसता
रहे
तो
बेहतर
है
शे'र
होता
रहे
तो
अच्छा
है
एक
धोका
सही
तिरा
होना
पर
ये
धोका
रहे
तो
अच्छा
है
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मसीहा
अपनी
कोशिश
कर
चुके
हैं
मगर
जिस
को
दवा
से
मसअले
हैं
तुम्हारा
झूट
दुनिया
घूम
आया
मिरे
सच
के
अभी
तस्में
खुले
हैं
मैं
बस
इस
दुख
में
आधी
रह
गई
हूँ
जो
अच्छे
दिन
थे
पूरे
हो
चुके
हैं
तिरे
काँधे
से
लग
कर
कौन
रोया
ये
किस
के
बाल
उस
पर
रह
गए
हैं
सही
लोगों
को
चुनने
का
सिला
है
ग़लत
नंबर
से
मैसेज
आ
रहे
हैं
ये
सुन
कर
नींद
ही
उड़
गई
हमारी
हमारे
ख़्वाब
देखे
जा
रहे
हैं
बिछड़
जाते
तो
किस
को
मुँह
दिखाते
सो
फिर
से
मुँह
उठा
कर
आ
गए
हैं
ज़बानें
चल
रहीं
थीं
जैसे
आरे
क़दम
दोनों
के
उठ
उठ
कर
रुके
हैं
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बा-ख़ुदा
आप
भी
नहीं
हैं
जी
पारसा
आप
भी
नहीं
हैं
जी
एक
ही
बार
हैं
अगर
हम
तो
बारहा
आप
भी
नहीं
हैं
जी
शहर
सारा
अगर
रुकावट
है
रास्ता
आप
भी
नहीं
हैं
जी
अपनी
आदत
के
हाथ
हैं
मजबूर
बे-वफ़ा
आप
भी
नहीं
हैं
जी
हम
गुनहगार
हैं
तो
फिर
क्या
है
पारसा
आप
भी
नहीं
हैं
जी
आदमी
हैं
हमें
ये
है
एहसास
और
ख़ुदा
आप
भी
नहीं
हैं
जी
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