mujh men kuchh phool kya khile tere | मुझ में कुछ फूल क्या खिले तेरे

  - ain naqvi
मुझमेंकुछफूलक्याखिलेतेरे
लोगनाराज़होगएमुझसे
फिरबतातेकिकैसेचलनाहै
दोक़दमपहलेसाथतोचलते
येख़ुलासाहैएकचैप्टरका
तुमकहानीमेंदेरसेआए
इसलिएमैंनेफ़ासलारक्खा
सबमनाज़िरहैंदूरसेअच्छे
जान-लेवाहैयेअधूरापन
गएथेतोठीकसेआते
ख़ुदकोबीमारकरदियामशहूर
ताकिवोमुझसेराब्ताकरले
होकेमबहूतहोगएतस्वीर
तेरीतस्वीरदेखनेवाले
  - ain naqvi
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