shaam ki dhund se ik husn ne jhaanka to koi nazm hoi | शाम की धुँद से इक हुस्न ने झाँका तो कोई नज़्म होई

  - Aila Tahir
शामकीधुँदसेइकहुस्ननेझाँकातोकोईनज़्महोई
बस-किफिरग़मवहीइकग़मजोख़ुशआयातोकोईनज़्महोई
दिल-ए-बे-ताबमोहब्बतकीमलामतकाअमींडरसागया
रहबदलनाकभीउसशख़्सनेचाहातोकोईनज़्महोई
किसकासायाथाकड़ीधूपमेंइकऔरअलावकाबयाँ
कौनथाज़ख़्ममिरामुझकोदिखायातोकोईनज़्महुइ
वक़्तकेदीदा-ए-बे-रहमकोमा'लूमथाक्याछीनाहै
ख़ालीहाथोंकोभरीआँखसेदेखातोकोईनज़्महोई
ख़्वाबकीतितलीकेटूटेहुएपरऔरबिखरतेहुएरंग
इसकमाईकाकभीसदक़ाउतारातोकोईनज़्महोई
  - Aila Tahir
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy