zindagi bhi vaba lagii hai mujhe | ज़िंदगी भी वबा लगी है मुझे

  - Faiz Ahmad
ज़िंदगीभीवबालगीहैमुझे
साँसलेनासज़ालगीहैमुझे
जिएजानेकादिलनहींकरता
एकलड़कीक़ज़ालगीहैमुझे
किसीकोचैनमिलरहाहैमिरा
किसीकीचोटलगीहैमुझे
मुझेतुझसेेजुदाकिएदेना
उसख़ुदाकीख़तालगीहैमुझे
देखकरआजउसेकिसीकेसाथ
किसीकीयादलगीहैमुझे
इकतिरामर्ज़हैजोजातानहीं
गोदवातोसबलगीहैमुझे
इकहीआदतहैमैकशीकीमुझे
एकआदतभीक्यालगीहैमुझे
उसकेनज़दीकतोवोकुछभीनहीं
जोमुहब्बतख़ुदालगीहैमुझे
मेरीबे-कारीकासबबमतपूछ
किसीकीबद्दुआलगीहैमुझे
जिसजगहछोड़करगईथीवो
वोज़मींकरबलालगीहैमुझे
  - Faiz Ahmad
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