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Faiz Ahmad
zindagi bhi vaba lagii hai mujhe
zindagi bhi vaba lagii hai mujhe | ज़िंदगी भी वबा लगी है मुझे
- Faiz Ahmad
ज़िंदगी
भी
वबा
लगी
है
मुझे
साँस
लेना
सज़ा
लगी
है
मुझे
जिए
जाने
का
दिल
नहीं
करता
एक
लड़की
क़ज़ा
लगी
है
मुझे
किसी
को
चैन
मिल
रहा
है
मिरा
किसी
की
चोट
आ
लगी
है
मुझे
मुझे
तुझ
सेे
जुदा
किए
देना
उस
ख़ुदा
की
ख़ता
लगी
है
मुझे
देख
कर
आज
उसे
किसी
के
साथ
किसी
की
याद
आ
लगी
है
मुझे
इक
तिरा
मर्ज़
है
जो
जाता
नहीं
गो
दवा
तो
सब
आ
लगी
है
मुझे
इक
ही
आदत
है
मैकशी
की
मुझे
एक
आदत
भी
क्या
लगी
है
मुझे
उसके
नज़दीक
तो
वो
कुछ
भी
नहीं
जो
मुहब्बत
ख़ुदा
लगी
है
मुझे
मेरी
बे-कारी
का
सबब
मत
पूछ
किसी
की
बद्दुआ
लगी
है
मुझे
जिस
जगह
छोड़
कर
गई
थी
वो
वो
ज़मीं
करबला
लगी
है
मुझे
- Faiz Ahmad
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अब
बिछड़ने
पर
समझ
पाते
हैं
हम
इक
दूसरे
को
इम्तिहाँ
के
ख़त्म
हो
जाने
पे
हल
याद
आ
रहा
है
Nishant Singh
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ज़रूरत
सब
कराती
है
मोहब्बत
भी
इबादत
भी
नहीं
तो
कौन
बेमतलब
किसी
को
याद
करता
है
Umesh Maurya
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तुम
जाओ
पर
यादों
को
तो
रहने
दो
यादों
का
भी
एक
सहारा
होता
है
Sachin Shalini
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तिरा
ख़याल
बहुत
देर
तक
नहीं
रहता
कोई
मलाल
बहुत
देर
तक
नहीं
रहता
उदास
करती
है
अक्सर
तुम्हारी
याद
मुझे
मगर
ये
हाल
बहुत
देर
तक
नहीं
रहता
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Noon Meem Danish
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याद
उसे
इंतिहाई
करते
हैं
सो
हम
उस
की
बुराई
करते
हैं
Jaun Elia
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गली
में
बैठे
हैं
उसकी
नज़र
जमाए
हुए
हमारे
बस
में
फ़क़त
इंतिज़ार
करना
है
Swapnil Tiwari
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सफ़र
के
बाद
भी
ज़ौक़-ए-सफ़र
न
रह
जाए
ख़याल
ओ
ख़्वाब
में
अब
के
भी
घर
न
रह
जाए
Abhishek shukla
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क्या
सितम
है
कि
अब
तिरी
सूरत
ग़ौर
करने
पे
याद
आती
है
Jaun Elia
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'अमीर'
अब
हिचकियाँ
आने
लगी
हैं
कहीं
मैं
याद
फ़रमाया
गया
हूँ
Ameer Minai
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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जो
लाए
थे
तेरे
कहने
पे
हम
पहनने
को
तुम्हारे
बाद
में
वो
कपड़े
भी
जला
दिए
हैं
Faiz Ahmad
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रोज़
मेरे
घर
की
जिम्मेदारियाँ
मुझ
को
आ
कर
भूल
जाने
का
तुझे
अब
मशवरा
दे
रही
हैं
Faiz Ahmad
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फलाँ
तारीख़
को
वो
बातें
जो
की
थी
हमने
वही
काफ़ी
हैं
मिरे
ज़ख़्म
जलाने
के
लिए
Faiz Ahmad
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कैसे
गुज़रेगी
ज़िन्दगी
तुम
बिन
बस
इसी
सोच
में
गुज़र
रही
है
Faiz Ahmad
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बे-वफा़ई
करी
है
तुम
ने
मगर
एक
मैं
हूँ
कि
रब
से
लड़
रहा
हूँ
Faiz Ahmad
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