qahr barsa gaii visaal ke saath | क़हर बरसा गई विसाल के साथ

  - Faiz Ahmad
क़हरबरसागईविसालकेसाथ
चेहरा-ए-हुस्न-ए-बे-मिसालकेसाथ
उसकामेयार-ए-हुस्नमतपूछो
आरिज़-ए-गुल-गूँ,वोभीख़ालकेसाथ
वोमुलाक़ातकैसेयादहो
इसक़दरसादगीजमालकेसाथ
उसकीसादालिबासीहैजबज़हर
क्यासितमढाएगीवोलालकेसाथ
उसकीआँखेंतोशिर्ककरवादें
उसकोमततोलिएगज़ालकेसाथ
हरघड़ीनूरबढ़तारहताहै
उसकीबनतीनहींज़वालकेसाथ
ज़ेहनमेंचेहरारक़्सकरतारहा
रातगुज़रीबड़ीमुहालकेसाथ
ख़्वाहिश-ए-दिलभीथीनक़ाबहटाए
थाहिजाबइसक़दरकमालकेसाथ
शा'इरीमेंभीदिलनहींलगता
दख़्लदेतीहैवोख़्यालकेसाथ
  - Faiz Ahmad
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