vo KHvaab sa paikar hai gul-e-tar ki tarah hai | वो ख़्वाब सा पैकर है गुल-ए-तर की तरह है

  - Ahmad Ziya
वोख़्वाबसापैकरहैगुल-ए-तरकीतरहहै
आँखोंमेंगईशामकेमंज़रकीतरहहै
एहसासदिलातीहैयेफैलीहुईख़ुश्बू
उसघरकीमोहब्बतभीमिरेघरकीतरहहै
मैंआईनाजैसाहूँकोईतोड़डाले
हरशख़्समिरीराहमेंपत्थरकीतरहहै
इकमैंहूँकिलहरोंकीतरहचैननहींहै
इकवोहैकिख़ामोशसमुंदरकीतरहहै
वोजिसने'ज़िया'हर्फ़भीदिलमेंउतारा
वोआजसर-ए-बज़्मसुख़न-वरकीतरहहै
  - Ahmad Ziya
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