daroon-e-zaat aziyyat thii aur tum nahin the | दरून-ए-ज़ात अज़िय्यत थी और तुम नहीं थे

  - Ahmad Waqas
दरून-ए-ज़ातअज़िय्यतथीऔरतुमनहींथे
मुझेतुम्हारीज़रूरतथीऔरतुमनहींथे
मैंख़्वाबमेंतुम्हेंयक-लख़्तछूनेवालाथा
फिरउसकेबादहक़ीक़तथीऔरतुमनहींथे
इसीलिएतोमोहब्बतकोफ़ौक़ियतदीहै
किमेरेसाथमोहब्बतथीऔरतुमनहींथे
मैंचाहकरभीदरआताथाख़यालोंमें
मगरतुम्हेंयेसुहूलतथीऔरतुमनहींथे
गुज़रनेवालानहींथामगरगुज़ारलिया
वोदिनकिजबहमेंफ़ुर्सतथीऔरतुमनहींथे
  - Ahmad Waqas
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy