दरून-ए-ज़ातअज़िय्यतथीऔरतुमनहींथे
मुझेतुम्हारीज़रूरतथीऔरतुमनहींथे
मैंख़्वाबमेंतुम्हेंयक-लख़्तछूनेवालाथा
फिरउसकेबादहक़ीक़तथीऔरतुमनहींथे
इसीलिएतोमोहब्बतकोफ़ौक़ियतदीहै
किमेरेसाथमोहब्बतथीऔरतुमनहींथे
मैंचाहकरभीदरआतानथाख़यालोंमें
मगरतुम्हेंयेसुहूलतथीऔरतुमनहींथे
गुज़रनेवालानहींथामगरगुज़ारलिया
वोदिनकिजबहमेंफ़ुर्सतथीऔरतुमनहींथे