pahunch ka mas'ala hal kar raha hooñ | पहुँच का मसअला हल कर रहा हूँ

  - Ahmad Waqas
पहुँचकामसअलाहलकररहाहूँ
मैंदरवाज़ामुक़फ़्फ़लकररहाहूँ
अगरमिलनानहींतुमनेकहींभी
मैंअपनेपाँवक्यूँशलकररहाहूँ
सितारेलारहाहूँआसमाँसे
मुरत्तबतेरीपायलकररहाहूँ
तुम्हारीयाददरियाबुर्दकरके
अधूरापनमुकम्मलकररहाहूँ
वोदिलमेंबसेगादेखलेना
जिसेआँखोंसेओझलकररहाहूँ
  - Ahmad Waqas
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