ilm bhi aazaar lagta hai mujhe | इल्म भी आज़ार लगता है मुझे

  - Ahmad Soz
इल्मभीआज़ारलगताहैमुझे
आदमीअख़बारलगताहैमुझे
चीख़तीसड़केंधुआँपेट्रोलबू
शहरतोबीमारलगताहैमुझे
इसक़दरमहफ़ूज़रहताहैकिवो
रामकाअवतारलगताहैमुझे
रोज़नज़्मेंकहनाछपवानाकहीं
एककारोबारलगताहैमुझे
शाएरीअच्छीबुरीमालूमहै
बाक़ीसबबेकारलगताहैमुझे
  - Ahmad Soz
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