kya kya mohabbaton ke zamaane badal ga.e | क्या क्या मोहब्बतों के ज़माने बदल गए

  - Ahmad Riyaz
क्याक्यामोहब्बतोंकेज़मानेबदलगए
अबतुमकभीमिलेहोतोआँसूनिकलगए
फ़र्त-ए-ग़म-ए-हवादिस-ए-दौराँकेबावजूद
जबभीतिरेदयारसेगुज़रेमचलगए
मैंनुक्ता-चींनहींहूँमगरयेबताइए
वोकौनथेजोहँसकेगुलोंकोमसलगए
कुछदस्त-ए-गुल-फ़रोशमेंसँवलाकेरहगए
कुछबाग़बाँकीबर्क़-नवाज़ीसेजलगए
तुमनेहमेंफ़रेब-ए-क़यादतदियातोहै
लेकिनकभीहुआहैकितूफ़ानटलगए
इकवोभीथेजोबहगएमौजोंकेसाथसाथ
इकहमभीहैंजोखाकेथपेड़ेसँभलगए
  - Ahmad Riyaz
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